एक महीने के भीतर देश को मिल जाएंगे 20000 से अधिक डॉक्टर, FMGE योद्धा अपनी मातृभूमि की सेवा के लिए तैयार हैं

एक महीने के भीतर  देश को मिल जाएंगे 20000 से अधिक डॉक्टर, FMGE योद्धा अपनी मातृभूमि की सेवा के लिए तैयार हैं

नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस अपने चरम पर है। ऐसे में देश के सामने डॉक्टर्स की कमी की भी एक बड़ी समस्या सामने आई है। इस बीच देश के 1 लाख से अधिक छात्रों के लिए उम्मीद की किरण जगी है। दरअसल विदेश में एमबीबीएस की पढ़ाई कर देश वापस आए छात्रों ने इस संकट की घड़ी में देश की सेवा करने की इच्छा जताई है। उनकी इस इच्छा का समर्थन करते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने भी इस संदर्भ में स्वास्थ्य मंत्रालय से इन्हें सेवा देने का अवसर प्रदान करने की सिफारिश की है। साथ ही साथ एफएमजीई परीक्षा में पासिंग कटऑफ को 50 फीसदी से कम कर 30 फीसदी करने की मांग भी की है। 

मिली जानकारी के अनुसार आईएमए की सिफारिश के बाद सरकार ने भी इस पर गंभीरता से विचार किया। माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही इस बारे में कोई सकारात्मक फैसला ले सकती है। सरकार के इस फैसले से जहां 1 लाख से अधिक मेडिकल छात्रों को राहत मिलेगी। वहीं एक महीने के अंदर देश को लगभग 20 हजार से अधिक डॉक्टर्स भी मिल जाएंगे। इस बारे में छात्रों ने मांग की है कि एफएमजीई परीक्षा में उनका पासिंग कटऑफ भी 50 फीसदी से घटा कर 30 फीसदी कर दिया जाए। आईएमए ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय को सिफारिश भेजी है। 

मालूम हो कि विदेशों के मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस की डिग्री लेकर आए भारतीय डॉक्टर्स की भी फौज है।भारत में मौजूदा नियमों के मुताबिक किसी भी दूसरे देश के मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री लेकर वतन लौटे डॉक्टर को अपने यहां के किसी अस्पताल सह मेडिकल कॉलेज में साल भर इंटर्नशिप करनी होती है। फिर फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जाम (एफएमजीई) पास करना होता है। जिसमें पूर्व में पासिंग कटऑफ 50 फीसदी था। इसे पास करने के बाद ही छात्र चिकित्सा कार्य कर सकते हैं।